Karur rally tragedy & Vijay: तमिलनाडु की राजनीति और फिल्म इंडस्ट्री में हलचल तब और बढ़ गई जब अभिनेता से राजनेता बने विजय की रैली में भगदड़ से 40 लोगों की मौत हो गई। अब इस हादसे को लेकर विजय विपक्ष और छात्रों के निशाने पर आ गए हैं।
क्या है मामला?
27 सितंबर को तमिलनाडु के करूर ज़िले में तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) प्रमुख और अभिनेता विजय की एक रैली के दौरान भयानक भगदड़ मच गई, जिसमें कम से कम 40 लोगों की मौत हो गई है। इस दर्दनाक घटना के बाद जहां एक तरफ विजय ने मृतकों के परिजनों को मुआवज़ा देने का ऐलान किया, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने विजय की आलोचना शुरू कर दी है।
विजय को बताया “हत्यारा” लगे पोस्टर्स
तमिलनाडु छात्र संघ ने विजय के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए राज्य में विरोधी पोस्टर लगाए हैं। इन पोस्टर्स में विजय को “हत्यारा” बताया गया है और उनकी तस्वीर में हाथ खून से सने हुए दिखाए गए हैं। पोस्टर पर लिखा गया है, “39 निर्दोष जीवन का बलिदान, पलायन और नाम रखा विजय। मुझे राजनीतिक संबद्धता के कारण हत्यारे के रूप में गिरफ्तार करो।”
घर को मिली बम से उड़ाने की धमकी
करूर रैली हादसे के बाद, विजय को मिली एक गंभीर धमकी ने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी। एक गुमनाम कॉल के जरिए विजय के चेन्नई स्थित नीलांकरई घर को बम से उड़ाने की धमकी दी गई थी। हालांकि, चेन्नई पुलिस और सीआरपीएफ ने बम-स्क्वायड और डॉग-स्क्वायड के साथ उनके घर की गहन तलाशी ली, लेकिन कोई संदिग्ध वस्तु या विस्फोटक नहीं मिला। इसके बाद विजय के घर की सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।
रैली छोड़कर चेन्नई लौटे विजय, मुआवज़े का ऐलान
हादसे के बाद विजय रैली स्थल छोड़कर तुरंत चेन्नई लौट आए थे। इसके बाद उन्होंने एक बयान जारी कर घटना पर गहरा दुख जताया और मृतकों के परिवार को 20-20 लाख रुपये मुआवज़ा देने की घोषणा की है। हालांकि सोशल मीडिया पर कई यूज़र्स ने विजय से यह सवाल भी किया कि “रैली से भागे क्यों?” यह प्रश्न अब एक बड़ा नैतिक और राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा है।
CBI जांच की मांग, कोर्ट में याचिका
विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) ने इस घटना को लेकर साजिश का आरोप लगाया है। पार्टी की ओर से CBI जांच की मांग करते हुए मद्रास हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। माना जा रहा है कि इस याचिका पर आज ही सुनवाई हो सकती है।
क्या कहता है ये पूरा घटनाक्रम?
विजय, जो हाल ही में फिल्मों से राजनीति की ओर रुख कर चुके हैं, उनके लिए ये घटना राजनीतिक करियर की सबसे बड़ी परीक्षा बनकर सामने आई है। जहां एक तरफ उनके प्रशंसक उनकी संवेदनशीलता की तारीफ कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष, छात्र संगठन और सोशल मीडिया यूज़र उन्हें जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।

