विशेष पॉक्सो अदालत ने नाबालिग बेटी के साथ दुष्कर्म के मामले में दोषी पाए गए वायु सेना कर्मी को 20 वर्ष की कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने इस जघन्य अपराध पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि जिस पिता की जिम्मेदारी अपनी बेटी की सुरक्षा करना थी, उसी ने उसके बचपन और मानसिक संतुलन को गहरा आघात पहुंचाया।
विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो) अर्चना सागर की अदालत ने दोषी पर 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। इसके साथ ही पीड़िता को तीन लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया गया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे गंभीर अपराधों में किसी भी प्रकार की नरमी न्याय के साथ अन्याय होगी।
पीड़िता ने अदालत को बताया कि उसके साथ बेहद कम उम्र, लगभग 5–6 साल से ही यौन शोषण किया जा रहा था। आरोपी उसे डराने और चुप कराने के लिए धमकियां देता था और मानसिक रूप से प्रताड़ित करता था। उसने बच्ची को यह विश्वास दिलाने की कोशिश की कि यह सब सामान्य है, ताकि वह किसी से कुछ न कह सके।
लगातार वर्षों तक अत्याचार सहने के बाद पीड़िता ने नवंबर 2023 में साहस दिखाते हुए अपनी मां को पूरी सच्चाई बताई। 20 नवंबर को आरोपी द्वारा दोबारा गलत हरकत किए जाने पर मां ने रायपुर पुलिस को सूचना दी। मामले के सामने आने के बाद आरोपी गिरफ्तारी के भय से फरार हो गया था, जिसे बाद में पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।

