उत्तराखंड के पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में डिजिटल कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में हाल के वर्षों में बड़ी प्रगति देखने को मिली है। लंबे समय तक संचार सुविधाओं से वंचित रहे सैकड़ों गांव अब मोबाइल नेटवर्क से जुड़ चुके हैं, जिससे स्थानीय लोगों की जीवनशैली, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसरों में सकारात्मक बदलाव आ रहा है।

डिजिटल भारत निधि (Digital Bharat Fund) के तहत राज्य में बड़े पैमाने पर मोबाइल टावर स्थापित किए गए हैं। इस पहल के अंतर्गत 557 नए मोबाइल टावर लगाए गए, जिनकी मदद से 1,231 दूरस्थ गांवों को पहली बार प्रभावी 4G मोबाइल कनेक्टिविटी से जोड़ा गया। यह जानकारी राज्यसभा में केंद्रीय संचार एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. पेम्मासानी चंद्रशेखर ने, राज्यसभा सदस्य महेंद्र भट्ट के प्रश्न के उत्तर में दी।

सरकार द्वारा विशेष रूप से उन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया, जो भौगोलिक दृष्टि से कठिन, सीमावर्ती या अब तक नेटवर्क सुविधाओं से पूरी तरह वंचित थे। इन परियोजनाओं का उद्देश्य केवल नेटवर्क पहुंचाना ही नहीं, बल्कि डिजिटल समावेशन को बढ़ावा देना भी है, ताकि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच की डिजिटल दूरी कम की जा सके।

अगर पूरे राज्य की बात करें, तो उत्तराखंड के कुल 16,456 गांवों में से 16,305 गांवों तक 4G मोबाइल सेवाएं पहुंच चुकी हैं। यह आंकड़ा लगभग पूर्ण कवरेज को दर्शाता है, जो एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। इसके साथ ही राज्य तेजी से अगली पीढ़ी की तकनीक की ओर भी बढ़ रहा है—अब तक 4,729 गांवों में 5G नेटवर्क की शुरुआत हो चुकी है।

मोबाइल कनेक्टिविटी के साथ-साथ ब्रॉडबैंड सेवाओं का विस्तार भी तेज गति से किया जा रहा है। केंद्र सरकार की भारतनेट परियोजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाने का काम जारी है। 28 फरवरी 2026 तक उत्तराखंड की 1,993 ग्राम पंचायतों को ब्रॉडबैंड सेवाओं के लिए तैयार किया जा चुका है। वहीं, देशभर में यह संख्या 2,14,921 ग्राम पंचायतों तक पहुंच गई है।

इसके अलावा, संशोधित भारतनेट कार्यक्रम के तहत सरकार ने लगभग 2.64 लाख ग्राम पंचायतों को रिंग आधारित नेटवर्क से जोड़ने की योजना बनाई है। साथ ही, ऐसे 3.8 लाख गांव जहां ग्राम पंचायत नहीं हैं, वहां भी मांग के आधार पर इंटरनेट सुविधा उपलब्ध कराने की रणनीति तैयार की गई है।

इन सभी प्रयासों का सीधा असर उत्तराखंड के दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों पर पड़ रहा है। अब गांवों में ऑनलाइन शिक्षा, टेलीमेडिसिन, डिजिटल भुगतान, ई-गवर्नेंस सेवाएं और स्वरोजगार के नए अवसर तेजी से बढ़ रहे हैं। आने वाले समय में यह डिजिटल विस्तार राज्य के सामाजिक और आर्थिक विकास को नई दिशा देने में अहम भूमिका निभाएगा।