उत्तराखंड के प्रसिद्ध मां मनसा देवी मंदिर में दान और चढ़ावे की व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से मंदिर ट्रस्ट ने कई अहम फैसले लिए हैं। नई व्यवस्था के तहत अब मंदिर में सेवा देने वाले सभी पुजारियों को बिना जेब वाले कुर्ते पहनने होंगे। इसके साथ ही मंदिर में आने वाले दान और चढ़ावे की निगरानी के लिए सात सदस्यीय पर्यवेक्षण समिति का गठन किया गया है, जो पूरी प्रक्रिया पर नजर रखेगी।

मंदिर ट्रस्ट का कहना है कि यह निर्णय श्रद्धालुओं के विश्वास को और मजबूत करने तथा चढ़ावे के प्रबंधन को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए लिया गया है। हर साल देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु मां मनसा देवी के दर्शन के लिए पहुंचते हैं और बड़ी मात्रा में नकद दान, आभूषण तथा अन्य भेंट मंदिर में अर्पित करते हैं। ऐसे में चढ़ावे की व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित और निष्पक्ष बनाए रखने के लिए नई व्यवस्था लागू की गई है।

नई व्यवस्था के अनुसार मंदिर परिसर में सेवा देने वाले सभी पुजारियों के लिए बिना जेब वाले कुर्ते पहनना अनिवार्य होगा। ट्रस्ट का मानना है कि इससे किसी भी प्रकार के संदेह या विवाद की संभावना कम होगी और पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी दिखाई देगी। साथ ही श्रद्धालुओं का भरोसा भी पहले से अधिक मजबूत होगा।

दान और चढ़ावे की निगरानी के लिए गठित सात सदस्यीय पर्यवेक्षण समिति नियमित रूप से चढ़ावे की प्राप्ति, उसके संग्रह, गणना और सुरक्षित रखरखाव की प्रक्रिया की समीक्षा करेगी। समिति यह सुनिश्चित करेगी कि मंदिर में आने वाला प्रत्येक दान निर्धारित नियमों के अनुसार दर्ज हो और उसका सही तरीके से प्रबंधन किया जाए।

मंदिर प्रशासन का कहना है कि समय-समय पर व्यवस्था की समीक्षा भी की जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर इसमें और सुधार किए जाएंगे। ट्रस्ट का उद्देश्य केवल नियम लागू करना नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था विकसित करना है जिससे श्रद्धालु पूरी निष्ठा और विश्वास के साथ मां मनसा देवी के चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित कर सकें।

मंदिर ट्रस्ट को उम्मीद है कि इन नई व्यवस्थाओं से दान और चढ़ावे के प्रबंधन में पारदर्शिता बढ़ेगी, प्रशासनिक जवाबदेही मजबूत होगी और मंदिर की व्यवस्थाओं पर श्रद्धालुओं का भरोसा और अधिक सुदृढ़ होगा।