उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध बुग्यालों में ट्रैकिंग और कैंपिंग के शौकीनों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। करीब आठ वर्षों से लागू नाइट स्टे पर प्रतिबंध अब समाप्त हो गया है। सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण निर्देशों के बाद वन विभाग ने बुग्यालों में रात बिताने की अनुमति से जुड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है, जिससे रूपकुंड, वेदनी बुग्याल और आसपास के ट्रैकिंग रूटों पर पर्यटन गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद है।
दरअसल, वर्ष 2018 में पर्यावरण संरक्षण और बुग्यालों में लगातार घटती हरियाली को देखते हुए उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पर्यटकों के बुग्यालों में रात्रि विश्राम पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था। इस फैसले के बाद टेंट लगाने और रात बिताने पर रोक लग गई, जिसका सीधा असर रूपकुंड ट्रेक और उससे जुड़े पर्यटन व्यवसाय पर पड़ा।
प्रतिबंध के चलते लोहाजंग, वाण, दीदना, कुलिंग, मुंदोली और आसपास के गांवों में बने होमस्टे, होटल, लॉज और स्थानीय पर्यटन कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुए। कई युवाओं का रोजगार छिन गया और ट्रैकिंग गतिविधियां लगभग ठप हो गईं।
अब सुप्रीम कोर्ट ने 20 जुलाई 2026 को जारी अपने आदेश में हाईकोर्ट के 2018 के फैसले को निरस्त करते हुए नाइट स्टे पर लगी रोक हटाने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद बद्रीनाथ वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी सर्वेश कुमार दुबे ने 27 जुलाई को संबंधित वन क्षेत्राधिकारियों को न्यायालय के आदेशों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए हैं।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों और पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों ने इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि नाइट स्टे की अनुमति मिलने से ट्रैकिंग सीजन फिर से रफ्तार पकड़ेगा और गाइड, पोर्टर, होमस्टे संचालक, होटल व्यवसायी, टैक्सी ऑपरेटर तथा स्थानीय दुकानदारों सहित सैकड़ों लोगों को रोजगार मिलेगा।
पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि रूपकुंड और वेदनी बुग्याल जैसे विश्व प्रसिद्ध ट्रैकिंग स्थलों पर नाइट स्टे बहाल होने से उत्तराखंड के एडवेंचर टूरिज्म को भी बड़ा लाभ मिलेगा। हालांकि, वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि सभी गतिविधियां न्यायालय के पर्यावरण संरक्षण संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए ही संचालित की जाएंगी।

