केदारनाथ-बासुकीताल ट्रैक रूट पर ट्रैकिंग के लिए गए पांच सदस्यीय दल से संपर्क टूटने के बाद प्रशासन ने बड़े स्तर पर खोज एवं बचाव अभियान शुरू कर दिया है। लापता ट्रेकर्स की तलाश के लिए एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस, वन विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों की टीमें जुटी हुई हैं। उच्च हिमालयी क्षेत्र में खराब मौसम और कम दृश्यता के कारण हवाई खोज अभियान में भी दिक्कतें सामने आई हैं।
जानकारी के अनुसार, परिजन यशवंत सिंह चौहान ने जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र (DEOC), रुद्रप्रयाग को मामले की सूचना दी। उन्होंने बताया कि उनके भाई प्रवेश चौहान 25 सितंबर को पांच साथियों के साथ केदारनाथ-बासुकीताल ट्रैक पर गए थे। दल की आगे ऑडिन कोल होते हुए गंगोत्री जाने की योजना थी। निर्धारित समय के बाद दल से संपर्क नहीं होने पर परिजनों ने प्रशासन को इसकी जानकारी दी।
सूचना मिलते ही जिला आपदा प्रबंधन विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस नियंत्रण कक्ष, वन्यजीव प्रभाग गोपेश्वर और 40वीं वाहिनी पीएसी से समन्वय स्थापित किया। इसके बाद ट्रेकिंग रूट और संभावित क्षेत्रों में खोजबीन के लिए विभिन्न टीमों को सक्रिय किया गया।
लापता बताए जा रहे ट्रेकिंग दल में अमित फर्सवाण (40वीं वाहिनी पीएसी, हरिद्वार), नवीन रावत (40वीं वाहिनी पीएसी, रुद्रप्रयाग), प्रवेश चौहान (फोरेस्टर, उत्तरकाशी), विवेक (जग्गी बगवान निवासी) और संजय सिंह रावत (पशुपालन विभाग, केदारनाथ) शामिल हैं।
राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र, देहरादून के निर्देश पर एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और वन विभाग की टीमें ट्रैक रूट पर संभावित स्थानों पर तलाश अभियान चला रही हैं। टीमों द्वारा जमीन के रास्ते ट्रैक रूट, आसपास के जंगलों और अन्य संभावित क्षेत्रों की जांच की जा रही है।
वहीं, जिलाधिकारी के निर्देश पर यूकाडा के सहयोग से हेलिकॉप्टर के जरिए भी हवाई सर्च अभियान चलाया गया। हालांकि, उच्च हिमालयी क्षेत्र में मौसम खराब होने और कम दृश्यता के कारण हेलिकॉप्टर से चलाया जा रहा अभियान फिलहाल स्थगित करना पड़ा। प्रशासन के अनुसार, मौसम की स्थिति अनुकूल होने पर दोबारा हवाई सर्वेक्षण और सर्च ऑपरेशन शुरू किया जाएगा।
फिलहाल जमीनी स्तर पर राहत एवं बचाव दल लगातार अभियान में जुटे हुए हैं। प्रशासन की ओर से ट्रेकिंग दल के संभावित मार्ग, अंतिम संपर्क और उपलब्ध जानकारी के आधार पर तलाश का दायरा बढ़ाया जा रहा है। उच्च हिमालयी क्षेत्र की चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों और मौसम को देखते हुए रेस्क्यू टीमों को सावधानी के साथ अभियान चलाना पड़ रहा है।

